फूल है
गंध है
बाग है
बहार है
शब्द है
काव्य है
कलम है
दवात है
किताब है
ध्वनि है
गीत है
संगीत है
साज है।
ये है ही फूल है
है ही गंध है
ये है ही बाग है
है ही बहार है
है ही शब्द है
है ही काव्य है
है ही कलम है
है ही दवात है
है ही किताब है
है ही ध्वनि है
है ही गीत है
है ही संगीत है
है ही साज है
है ही परिधान है
है ही आभूषण है
है ही घर है
है ही मकान है।
है ही अस्तित्व है
अस्तित्व का प्रमान है
है ही ब्रह्म है
है ही भगवान है।
-देवेंद्र प्रताप वर्मा 'विनीत'
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