घर की चौखट पर खड़ी
आकाश को निहारती
उड़ती पास आती
गौरैया को देखकर
कृत्रिम घोंसले की ओर
इशारा करती
अति उत्साहित प्रफुल्लित हो
जिज्ञासा ने
गौरैया से कहा
आओ गौरैया आओ
देखो अपना नया घर
मैंने तुम्हारे लिए
घोंसला बनाया है।
गौरैया बोली
सुन प्यारी
मेरे लिए घर मत बनाओ
मेरा बनाया घर ही मुझे भाता है
घोंसला बनाना अच्छी तरह से आता है।
तुम तो बस पेड़ बचाओ
जंगल उगाओ
जंगल और पेड़ बचे रहे
तो घोंसले और घर मैं
बना लूंगी।
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