Sunday, April 26, 2026

अंधियारा

दिन में नहीं दिखाई देता,
रात में आता है बेचारा।
माँ मुझको एक टॉर्च दिला दो
मुझे देखना है अँधियारा।

सब कहते हैं काला-काला,
क्या इसके भी हाथ-पाँव हैं?
सूरज के जाते ही आता,
बड़ी निराली इसकी ठाँव है।

खिड़की के पीछे छिपता है,
या अलमारी के अंदर?
मैं इसको आज पकड़ लूँगा
बनकर छोटा सा बंदर।

जैसे ही मैं बटन दबाऊँ,
यह तो फौरन भाग गया।
शायद मेरी टॉर्च देख कर,
अँधियारा भी जाग गया!

माँ ने हँसकर समझाया,
अंधेरे से मत डरना लाल।
सूरज सोए, चाँद जगाए,
यही प्रकृति का है कमाल।

बिना रात के नींद न आती,
सपनों का सुख कौन चखाता?
अंधियारा प्यारा साथी है 
जो नया सवेरा लेकर आता।

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