Saturday, November 15, 2025

सुन बेटी इक बात पते की

अभी साथ हैं पुष्प सुगंधित
तितली भँवरे कलियां माला
सुन बेटी इक बात पते की
जीवन है संघर्षों वाला

खेल खिलौने खेल खेल में 
जैसे तू हँसती आई
फिक्र छोड़कर हार जीत की
मुस्कानों में बसती आई
आगे चलकर ऐसे ही नित 
जीवन में तू खिलती रहना
देख चिरैया अंगनाई में
चूं चूं यही चहकती आई।

चाँद सुनहरा आसमान से
गीत सुनाता है मतवाला
सुन बेटी इक बात पते की
जीवन है संघर्षों वाला।

राह तेरी आसान न होगी
फूलों का वरदान न होगी
किंतु जब तक पांव चुभे न
कांटों से पहचान न होगी
दूषित दृष्टि प्रदूषित वाणी
चारो ओर दुष्ट खलगामी
अंगारे पथ में फैलाकर
पाश रचेंगे बहुआयामी।

लक्ष्मीबाई दुर्गा काली
कहे गार्गी,सिया, अपाला
सुन बेटी इक बात पते की
जीवन है संघर्षों वाला।

आंखें तो सुंदरता के ही 
दृश्य देखना चाहेंगी
तुम लेकिन संघर्षों पर
अपनी दृष्टि निरंतर रखना।
धर्मसूत्र बन पावनता का
ज्ञान नित्य जो मन भरमाए
आत्मसात करने से पहले
साविवेक सौ बार परखना।

नियम नीति के पीताम्बर में
अनुचित हो सकता है उजाला
सुन बेटी इक बात पते की 
जीवन है संघर्षों वाला।

निश्चित ही कल हम न होंगे
साथ तुम्हारे जीवन में
और न बोल हमारे होंगे
गुंजित मन के मधुबन में
फिर भी तुम मायूस न होना
न ही अपना धीरज खोना
तुम हो जिज्ञासा जीवन की
अंतर्मन से नीरज होना।

माँ बाबा के हृदय कंठ की
हो अनमोल मौक्तिक माला
सुन बेटी इक बात पते की
जीवन है संघर्षों वाला।